सिद्ध महाकाली कवच (लॉकेट)

By | May 4, 2022

महाकाली का नाम सुनते ही शुत्रु थर थर कापने लगते है | माँ के सभी रूपों में से महाकाली रूप को सबसे उग्र व शक्तिशाली माना गया है | जो जातक शत्रुओं से परेशान है उपरी बाधा व किसी भी प्रकार के किये कराये से परेशान हो चुका है ऐसे जातक के लिए आज हम लेकर आये है महाकाली जी का सिद्ध कवच लॉकेट | इस लॉकेट को शास्त्रोक्त विधि द्वारा बनाया गया है |

सिद्ध महाकाली कवच/लॉकेट :

जो जातक रात को डरते है या उन्हें बार-बार भय की अनुभूति होती है | यदि किसी जातक को लगता है कि उस पर किसी ने कोई तांत्रिक क्रिया करा दी है या कोई जातक अपने शत्रु से परेशान है तो ऐसे में सिद्ध महाकाली कवच न केवल उनकी रक्षा करता है बल्कि ऐसे जातक को महाकाली जी का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है जिससे उन्हें जीवन में नई सकारात्मक उर्जा प्राप्त होती है |

सिद्ध महाकाली कवच निर्माण विधि :

सिद्ध-महाकाली-कवच-तावीज

चित्र में दिखाए गये मंत्र को भोजपत्र पर अष्टगंध युक्त स्याही द्वारा अनार की कलम द्वारा अंकित किया जाना चाहिए | अब एक चांदी का तावीज लेकर उसमें इस मंत्र युक्त भोजपत्र को डाले+ 2 सियार सुई + 1 सफ़ेद चरमक + 1 लाल चरमक + 1 काली मिर्च व कुछ राई के दाने डाले | ये सभी तावीज में अच्छे से डालकर इसे अच्छे से बंद कर दे | अब इस तावीज में काला धागा डाल ले | इस प्रकार से महाकाली जी का चमत्कारी कवच बनकर तैयार हो जाता है |

महाकाली जी का कवच निर्माण करने के उपरांत इसे मंत्र शक्ति द्वारा सिद्ध करना अति आवश्यक है | सिद्ध करने के उपरांत ही यह कवच सक्रिय बनता है | इस सिद्ध करने हेतु आप पहले कवच का विधिवत पुजन करें अब  दिए गये मंत्र(ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हलीं ह्रीं खं स्फोटय क्रीं क्रीं क्रीं फट) के कम से कम 1100 जप करें | मंत्र जप के उपरांत हवन कार्य संपन्न करें | हवन में अधिक से अधिक आहुति महाकाली मंत्र की दी जानी चाहिए | हवन कार्य पूर्ण होने के उपरांत हवन के ऊपर से कवच को 21 बार घुमाकर हवन की विभूति से कवच को तिलक करना चाहिए |

इस प्रकार से महाकाली जी का सिद्ध कवच बनकर तैयार हो जाता है | इस जो भी जातक पूर्ण निष्ठा के साथ अपने गले में धारण करता है उसे हर प्रकार की उपरी बाधा से, तांत्रिक प्रयोग से और शत्रुओं से छुटकारा मिलता है |