भगवान श्री गणेश जी का सिद्ध चमत्कारी यंत्र

By | August 8, 2020

भगवान श्री गणेश हिन्दू धर्म में सबसे पहले पूजे जाने वाले देव है | जब भी किसी पूजा या अनुष्ठान की बात होती है तो सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा की जाती है | भारत देश के दक्षिण क्षेत्र में गणेश जी की भक्ति बहुत अधिक होती है | वैसे तो सम्पूर्ण हिन्दू धर्म में गणेश जी सर्वप्रथम पूजे जाते है किन्तु भारत के दक्षिणी क्षेत्रों में गणेश जी को ईष्ट देव के रूप में अपनाया जाता है |

भगवान श्री गणेश जी की भक्ति के बहुत से मार्ग है | सिद्ध गणेश यंत्र की स्थापना पूजा स्थल पर कर मंत्र द्वारा उनकी आराधना करना भी भगवान श्री गणेश की भक्ति मार्ग में एक है | सिद्ध यंत्र के माध्यम से भगवान श्री गणेश जी की आराधना बहुत ही शक्तिशाली व शीघ्र फल देने वाली है |

Ganesh Yantra Benefits :

भगवान श्री गणेश यंत्र की महिमा(लाभ) :

जो भक्त भगवान श्री गणेश यंत्र के माध्यम से उनकी आराधना करते है वे हर प्रकार से भगवान गणेश द्वारा फलीभूत होते है | उनकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है | ऐसे भक्त के घर में रिद्धि – सिद्धि आती है | उनके सब काम बनते है | घर से दरिद्रता दूर होती है | परिवार में सुख-शांति का वास होने लगता है | विद्यार्थी के लिए गणेश यंत्र का पूजन करना उनके बौद्धिक विकास में सहायक है |

जिस विद्यार्थी पर भगवान श्री गणेश जी की कृपा द्रष्टि होने लगती है वह जीवन में शिक्षा के क्षेत्र में बहुत आगे बढ़ता है और आगे चलकर वह एक तीक्ष्ण बुद्धि का स्वामी बनता है |

एक व्यवसाय के स्वामी को गणेश यंत्र/Ganesh Yantra अपने ऑफिस में अवश्य स्थापित कर नियमित इसकी पूजा करनी चाहिए | ऐसा करने से व्यवसाय बुरी नजर व अकस्मात हानि से बचता है और व्यवसाय के लाभ धीरे-धीरे बढ़ने लगते है |

गणेश यंत्र बनाने की विधि :

नीचे दिए गये गणेश यंत्र में रेखाओं और मंत्रों को बुधवार व गणेश चतुर्थी के दिन भोजपत्र पर अष्टगंधा की स्याई व अनार की कलम से शुभ मुहूर्त में बनाना चाहिए | यंत्र को बनाते समय गणेश जी का स्मरण करते रहना चाहिए | यंत्र के निर्माण के समय आपके विचार यंत्र को प्रभावित करते है | जैसे विचार और आपकी भावना यंत्र का निर्माण करते समय आपके होंगे,  यंत्र में शक्तियां भी उसके अनुसार ही समाहित होगी |

ganesh yantra

यह आवश्यक नहीं है कि आप भोजपत्र पर ही गणेश यंत्र/Ganesh Yantra को निर्मित करें | आप बाजार से अष्टधातु या ताम्रपत्र पर निर्मित गणेश यंत्र खरीद भी सकते है | वह भी उतना भी प्रभावी रहेगा | यंत्र किस प्रकार व किस धातु पर निर्मित किया गया है इससे अधिक यह महत्व रखता है कि यंत्र को किस प्रकार से अभिमंत्रित किया गया है |

सिद्ध गणेश यंत्र का महत्व :

शास्त्रों में प्राण प्रतिष्ठित यंत्र को पूजा स्थल पर रखने का उल्लेख मिलता है | यंत्र किसी भी देव का क्यों न हो उसे मंत्र द्वारा अभिमंत्रित करके पूजा स्थल पर स्थापित कर, नियमित पूजा करना अनिवार्य है | भगवान श्री गणेश के इस यंत्र को, भगवान श्री गणेश के मंत्र  ” ॐ गं गणपतयै नमः ” के 5000 जप कर यंत्र पूजा व हवन द्वारा सिद्ध किया जाना चाहिए | यंत्र की सिद्धि के लिए आप किसी अच्छे व योग्य पंडित का सहारा ले सकते है |

भगवान श्री गणेश के इस यंत्र को भी सिद्ध करने के उपरांत ही पूजा स्थल पर स्थापित करना चाहिए | जब एक यंत्र को सिद्ध किया जाता है तो वह सक्रिय हो जाता है | ऐसे यंत्र की प्रतिदिन पूजा अनिवार्य है |

गणेश यंत्र की स्थापना :

भगवान श्री गणेश के इस सिद्ध यंत्र को ईशान कोण या पूर्व दिशा की तरफ मंदिर बनाकर लाल कपड़ा बिछाकर स्थापित किया जाना चाहिए | यंत्र की स्थापना बुधवार के दिन व गणेश चतुर्थी के दिन शुभ मानी गयी है | यदि आपका पूजा मंदिर पहले ही पूर्व दिशा या ईशान कोण में है तो यंत्र को उसी पूजा मंदिर में लाल कपड़ा बिछाकर स्थापित करना चाहिए |

सिद्ध गणेश यंत्र की नियमित पूजा विधि :

प्रतिदिन स्नान आदि से निवृत होकर, साफ़-स्वच्छ कपड़े पहनकर,  खाली पेट यंत्र की उपासना करने से अधिक लाभ मिलता है | यंत्र के सामने धुप व दीपक प्रज्वल्लित करें व गणेश जी के स्तुति मंत्र का स्मरण करें | इसके उपरांत गणेश जी के इस मंत्र का उच्चारण कम से कम 21 बार व अधिकतम अपनी श्रद्धा अनुसार करना चाहिए | गणेश मंत्र : ” ॐ गं गणपतयै नमः ” | बुधवार के दिन यंत्र को पुष्प, दूर्वा व मोदक का भोग अर्पित कर साथ में नियमित पूजा करनी चाहिए |

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अल्टीमेट ज्ञान संस्थान द्वारा भोजपत्र पर निर्मित श्री गणेश यंत्र/Ganesh Yantra को आचार्य S N शर्मा के मार्गदर्शन द्वारा अभिमंत्रित किया गया है | इस यंत्र को प्राप्त करने के लिए आप इस नंबर : 9671528510 पर whats app के माध्यम से संपर्क कर सकते है |

 

 

 

 

 

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