असाध्य रोग होने पर क्या करें ? असाध्य रोग होने पर जीवन निर्वाह करने की कला सीखें

By | May 28, 2018

एक व्यक्ति पर तब दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है जब उसे पता लगता है कि वह किसी ऐसी बीमारी की गिरफ्त में है जिसका कोई इलाज ही नहीं है | असाध्य रोग किसी नर्क की यातना से कम नहीं, और ऐसे में यदि किशोर अवस्था में ही ऐसी बीमारी की गिरफ्त में आ जाये तो जीवन नर्क से भी अधिक पीड़ादायक लगने लगता है |

आज के आधुनिक युग में जहाँ विज्ञान ने चिकित्सा जगत में इतनी तरक्की कर ली है वहीँ आज भी बहुत सी ऐसी बीमारियाँ है जिनका कोई इलाज ही नहीं है |

असाध्य रोग पीड़ित को शारीरिक रूप से तो भयंकर कष्ट देता ही है साथ में मानसिक रूप से भी विकृत कर देता है | पीड़ित व्यक्ति के मन में हर समय नकारात्मक भाव चलते रहते है | पीड़ित व्यक्ति स्वयं को समाज और अपने परिवार के लिए बोझ समझने लगता है | किसी कार्य के लिए योग्य होते हुए भी उसे करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता |

असाध्य रोग होने पर क्या करें

यदि आप भी किसी ऐसी असाध्य बीमारी के शिकार है और इस चुनौती भरे जीवन से समन्वय स्थापित नहीं कर पा रहे है तो इस post में दी गयी जानकारी आपके लिए प्रेरणादायक सिद्ध हो सकती है |

असाध्य रोग होने पर इस प्रकार स्वयं को उर्जावान बनाये : –

सच को स्वीकार करें :-

भयंकर बीमारी की गिरफ्त में होने पर जातक लम्बे समय तक इस बात को स्वीकार करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता कि उसे ऐसी बीमारी हुई है जिसका कोई इलाज नहीं | जिस दिन पीड़ित व्यक्ति इस सच्चाई को मानसिक रूप से स्वीकार कर लेगा, उसी दिन से मानसिक रूप से वह प्रबल महसूस करने लग जायेगा |

विश्वास बनाये रखे :- 

विश्वास एक ऐसी शक्ति है जिसके बल पर मनुष्य हर मुश्किल का सामना कर सकता है | इसलिए जीवन में परिस्तिथियाँ कितनी भी विषम क्यों न हो जाये स्वयं पर विश्वास बनाये रखे | असाध्य रोग होने की दशा में यह विश्वास हर समय बनाये रखे कि कभी न कभी आपका यह रोग अवश्य ही ठीक हो जायेगा | चमत्कार कभी भी घटित हो सकते है इसलिए उस पल का इन्तजार करें जब कुछ ऐसी ही चमत्कारिक घटना आपके जीवन में भी घटित होगी |

अकेले न रहे, नये-नये दोस्त बनाये : –

असाध्य रोग होने पर सबसे जरुरी होता है मानसिक रूप से स्वयं को स्वस्थ रखना | किसी ने सच ही कहा है कि एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास होता है | शरीर के अस्वस्थ होने पर मन भी नकारात्मक विचारों से भरने लगता है | इसलिए जहाँ तक संभव हो सके मानसिक रूप से खुद को स्वस्थ रखने का प्रयास करें | अकेलापन तो एक स्वस्थ व्यक्ति को भी मानसिक रूप से बीमार बना सकता है | इसलिए अकेले बिल्कुल न रहे, नये-नये दोस्त बनाने का प्रयास करें | संगीत,सिनेमा,खेल जो भी आपको पसन्द हो उसे अपनी दिनचर्या में जरुर शामिल करें |

खुश रहने का प्रयास करें : –

इस संसार में प्रत्येक जीव अपने जन्म से लेकर मृत्यु तक सुख-दुःख को भोगता है | कुछ को सुख अधिक मिलते है तो कुछ को दुःख अधिक | जो सुखमय जीवन जीते है वे आपको सदा प्रसन्नचित दिखाई देते है और जो दुःख अधिक देखते है वे सदा निराश दिखते है | यह तो सिर्फ और सिर्फ एक सामान्य जीवन जीने की कला है | असली जीवन की परीक्षा तो वही देते है जो हर तरफ से दुखों से पीड़ित होते हुए भी सदा प्रसन्न रहते है |

अध्यात्म को अपनाए : – 

कभी आपने यह सोचा है कि उस परमपिता परमेश्वर ने हमें इंसान का जीवन देकर ही इस असाध्य रोग से क्यों पीड़ित किया | वे हमें किसी अन्य जीव के रूप में भी पीड़ित कर सकते थे | ऐसा इसलिए, क्योंकि कहीं न कहीं उन्होंने हमें अपने पिछले जन्म में किये पापों का प्रायश्चित करने का अवसर दिया है इंसान के रूप में इस यातना को देकर |

आज से ही आध्यात्म के मार्ग को अपनाएं | स्वयं को भगवान की शरण में समर्पित कर दे | भगवान से हर दिन अपने पूर्व जन्म के पापों के लिए क्षमा मांगे | निस्वार्थ दान-पुण्य करना शुरू कर दे | प्रतिदिन गाय को 2 रोटी खिलाएं | पक्षियों को दाना डाले | पक्षियों के लिए जल की व्यवस्था रखे | कुत्ते को रोटी खिलाएं | असहाय व्यक्ति की सहायता करें | आपका धर्म कोई भी हो दान-पुण्य का स्थान सभी धर्मों में सर्वोच्च माना गया है | इसलिए आज से ये सभी कार्य प्रतिदिन करना शुरू कर दे |

भूलकर भी कोई ऐसा कार्य न करें जिससे किसी को दुःख पहुंचे | यदि आप मांसाहार का सेवन करते है तो आज से ही बंद कर दे, क्योंकि कुछ घंटों की भूख को शांत करने के लिए किसी जीव की हत्या करना आपको पाप का भागी बनाता है |

जीवन में परिस्तिथियाँ चाहे कितनी भी विषम क्यों न हो जाये बस आपको मानसिक रूप से स्वयं को द्रढ़ बनाये रखना है | स्वयं को टूटने मत दे | इस संसार का नियम है कि जब तक हिम्मत है आप जीवित है, जिस दिन हिम्मत ने जवाब दे दिया उसी समझो आप मृत व्यक्ति के समान हो गये |

 

 

 

 

 

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