भगवान शिव की उपासना सोमवार के दिन ही क्यों ?

By | May 8, 2018

शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव की उपासना सप्ताह के प्रत्येक दिन फल देने वाली है तो फिर ऐसा क्या कारण है कि भगवान शिव की उपासना के लिए सोमवार का दिन विशेष फल देने वाला है | ऐसा प्रतीत होता है कि मनुष्य मात्र को सम्पत्ति से अत्यधिक प्रेम होता है | इसलिए उसने शिव के लिए सोमवार के दिन का चुनाव किया |

पुराणों के अनुसार सोम का अर्थ चंद्रमा होता है और चंद्रमा भगवान शंकर के शीश पर मुकुटायमान होकर अत्यंत सुशोभित होता है लगता है कि भगवान शंकर ने जैसे क्षीण चंद्रमा को उसके अपराधी होते हुए भी क्षमा कर अपने शीश पर स्थान दिया, वैसे भगवान हमें भी सिर पर नहीं तो अपने चरणों में जगह अवश्य देंगे | यह याद दिलाने के लिए सोमवार को ही लोगों ने शिव का वार बना दिया |

भगवान शिव की उपासना सोमवार को क्यों

सोम का अर्थ सौम्य होता है | भगवान शंकर अत्यंत शांत समाधिस्य देवता है | इस सौम्य भाव को देखकर ही भक्तों ने इन्हें सोमवार का देवता मान लिया | सहजता और सरलता के कारण ही इन्हें भोलेनाथ कहा जाता है | अथवा सोम का अर्थ होता है उमा के सहित शिव | केवल कल्याणकारी शिव की उपासना न करके साधक भगवती शक्ति की भी साथ में उपासना करना चाहता है | क्योंकि बिना शक्ति के शिव के रहस्य को समझना अत्यंत कठिन है, इसलिए भक्तों ने सोमवार को शिव का वार स्वीकृत किया | सोम में ॐ समाया हुआ है | भगवान शंकर ओंकार स्वरुप है | ओंकार की उपासना के द्वारा ही साधक अद्वैत स्थिति में पहुँच सकता है |

इसलिए इस अर्थ के विचार के लिए भगवान सदाशिव को सोमवार का देव कहा जाता है | सोम का अर्थ चंद्रमा है और चंद्रमा मन का प्रतीक है | जड़ मन को चैतन्य से प्रकाशित करने वाला परमेश्वर ही है | मन की चेतना को पकड़कर हम परमात्मा तक पहुँच सके, इसलिए देवाधिदेव भूतभावन पूतपावन परमेश्वर की उपासना सोमवार को की जाती है |

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