कामाख्या देवी मंदिर, माँ के 51 शक्तिपीठों में से तांत्रिक क्रियाओं के लिए सबसे मशहूर

By | November 6, 2017

Kamakhya Devi Mandir कामाख्या देवी मंदिर

शक्ति स्वरुप माँ सती के 51 शक्तिपीठों में से सबसे अधिक पुराना मंदिर कामाख्या देवी मंदिर है | कामाख्या देवी मंदिर असम राज्य की राजधानी दिसपुर के पास गुवाहाटी से मात्र 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है |  यह Kamakhya Devi Mandir मंदिर अपनी अनूठी मान्यताओं के लिए भी प्रचलित है | पूरे भारत वर्ष में यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जहाँ माँ के योनि भाग की पूजा होती है | पहाड़ी पर स्थित माँ के इस मंदिर में माँ का मुख्य स्थान मंदिर से 20 फुट नीचे गुफा में स्थित है |

51 शक्तिपीठ वे जगह है जहाँ माँ सती के देह त्याग के बाद भगवान विष्णु के चक्र द्वारा उनके अंग कटकर गिरे थे | जिस- जिस स्थान पर माँ सती के अंग गिरे आज वे सभी शक्ति पीठ कहलाते है कामाख्या देवी मंदिर में माँ सती का योनि भाग गिरा था इसीलिए इस मंदिर में गर्भगृह के आकार में माँ की पूजा की जाती है |

Kamakhya Devi Mandir

कामाख्या देवी मंदिर Kamakhya Devi Mandir से  जुड़े रोचक तथ्य :- 

कामाख्या देवी मंदिर अपनी अनूठी पूजा विधि और परम्पराओं के लिए पूरे विश्व भर में प्रसिद्द है | इस स्थान को माँ शक्ति का सबसे शक्तिशाली स्थान माना गया है | कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तो इस संसार का केंद्र बिंदु यही मंदिर है | आइये जानते है  Kamakhya Devi Mandir कामाख्या देवी मंदिर में विषय में रोचक जानकारियां जो सबकों हैरान कर देती है : –

योनि पूजा :-  पूरे भारत में यह एक ऐसा एकमात्र स्थान है जहाँ माँ की पूजा उनके योनि भाग के रूप में होती है | आश्चर्य की बात यह है कि मंदिर के मुख्य स्थान जिसे गर्भगृह कहते है वहां देवी की कोई मूर्ती व फोटो तक नहीं है | इस मंदिर में लगभग 20 फुट नीचे गुफा में एक योनी के आकार का कुंड है जिससे सदैव पानी निकलता रहता है | इसे योनि कुंड भी कहते है | यह योनि कुंड लाल कपडे व फूलों से ढका रहता है |

kamakhya mandir devi sati

तांत्रिक सिद्धि के लिए प्रख्यात मंदिर :- कामाख्या देवी मंदिर Kamakhya Devi Mandir तांत्रिक क्रियाओं के लिए पूरे भारत में सबसे अधिक महत्व रखता है | यहाँ कामाख्या देवी के साथ-साथ मंदिर के प्रांगण में ही अन्य देवियों के मंदिर भी है जो जिनकी सिद्धि प्राप्त करने हेतु तांत्रिक यहाँ आते है | कामाख्या देवी के साथ-साथ यहाँ माँ काली, तारा , सोदशी , भुवनेश्वरी , भैरवी , छिन्नमस्ता , धूमवती , बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी के मंदिर भी है | ये सभी देवियाँ विभिन्न तांत्रिक क्रियाओं की सिद्धि के लिए प्रसिद्द है | वर्ष में नवरात्रे व अम्बुबाची मेले के समय यहाँ तांत्रिकों का जमघट लगा रहता है |

अम्बुबाची मेला है इस मंदिर का विशेष पर्व : – माँ कामाख्या देवी मंदिर Kamakhya Devi Mandir का विशेष आकर्षण अम्बुबाची पर्व है | ऐसी मान्यता है कि इस पर्व के समय माँ कामाख्या रजस्वला होती है | वर्ष में एक बार जून माह के समय माँ कामाख्या देवी के रजस्वला होने पर तीन दिनों के लिए मंदिर के कपाट बंद हो जाते है और तीन दिन बाद जब मंदिर के कपाट फिर से खुलते है तो भक्तों का भारी भीड़ उनके दर्शन हेतु उमड़ पड़ती है | ऐसी मान्यता है कि इन तीन दिनों में योनि कुंड से जल प्रवाह की जगह खून का प्रवाह होने लगता है | और उनके इस बहते रक्त प्रवाह से पूरी ब्रह्मपुत्र नदी का रंग लाल हो जाता है | अम्बुबाची पर्व के दौरान मंदिर में जाना निषेद रहता है किन्तु इन तीन दिनों में भक्तजन मंदिर के बाहर ही अपनी-अपनी पूजा विधि द्वारा इस पर्व को मनाते है | और इस बीच अघौरी साधु और बहुत से तांत्रिक मंदिर के आस-पास ही गुफाओं में बैठकर तांत्रिक सिद्धियाँ प्राप्त करने का प्रयास भी करते है |

एक अनूठी परम्परा- रज से भीगा कपडा प्रसाद रूप में पाना : –  यह आपको सुनने में बहुत ही विचित्र और अनूठी लगेगा किन्तु यह सत्य है कि माँ कामाख्या के रजस्वला के दौरान पंडित एक स्वच्छ कपडा योनि कुंड के समीप रखते है और जैसे ही मंदिर के कपाट फिर से खुलते है माँ के रज से भीगा यह कपड़ा प्रसाद रूप में भक्तों में बाट दिया जाता है | भक्तों द्वारा इस कपडे को पाना उनके लिए किसी चमत्कार से कम नही होता |

बलि देने की परम्परा : – किसी भी देवी-देवता को खुश करने के लिए अपनी-अपनी श्रद्धा व सामर्थ्य अनुसार पूजा करना और पारम्परिक प्रथा का पालन करना तो ठीक है किन्तु किसी जानवर व पशु की बलि देकर देवी-देवता को खुश करना पूर्ण रूप से गलत है जो कि इंसान को अंधविश्वास की पराकाष्ठा तक ले जाता है | ऐसी ही एक बलि देने की प्रथा का चलन माँ कामाख्या देवी मंदिर/ Kamakhya Devi Mandir में भी है जहाँ कुछ लोगों द्वारा भैंस , बकरे ,कबूतर और मछलियों की बलि दी जाती है |

मंदिर का पुनः निर्माण :-  Kamakhya Devi Mandir माँ कामाख्या देवी मंदिर को 16वीं शताब्दी में तोड़ दिया गया था जिसे 17वीं शताब्दी में फिर से बिहार के राजा नारा  नारायण द्वारा बनवाया गया |

कामाख्या देवी मंदिर देवी सती

कामाख्या देवी मंदिर से जुडी कहानी The Story of Kamakhya Devi Mandir : – 

पौराणिक कथा अनुसार जब असुर नारकासुर ने अपनी शक्ति के घमंड में चूर होकर इंद्र देव को भी अपना बंधी बना लिया और माँ कामाख्या को अपनी पत्नी स्वरुप देखने का स्वप्न देखने लगा | तब माँ कामाख्या ने नारकासुर के सामने शर्त रखी कि यदि वह एक ही रात में इस नीलांचल पर्वत से मंदिर तक सीढियां बना लेगा तो मैं तुमसे विवाह कर लुंगी अन्यथा तुम्हारी मृत्यु निश्चित है | इतना सुन नारकासुर पर्वत से मंदिर तक सीढियां बनाने में जुट गया | जैसे ही वह एक दिन के समय में इन सीढियों को पूरा बना पाता माँ कामाख्या ने अपनी माया से एक कोए को मुर्गा बनाकर नारकासुर के इस कार्य को भंग करने को कहा |और इस प्रकार मायारूपी मुर्गे ने रात्रि में ही भोर होने के संकेत देकर नारकासुर के इस कार्य को भंग कर दिया | और इस प्रकार नारकासुर का मंदिर तक सीढियाँ बनाने का कार्य भंग हो गया | आज भी ये सीढियां अधूरी ही है |  ⇒ ♣  मोटापा कम करने के जबरदस्त घरेलु उपाय ♣ ⇐

जहाँ हमारे समाज में स्त्रियों को माहवारी के समय अपवित्र माना जाता है व किसी भी प्रकार के धार्मिक कार्यों में भाग लेने की अनुमति नहीं होती वहीँ माँ कामाख्या को माहवारी के समय सबसे पवित्र माना गया है और इस समय उनकी पूजा-आराधना करना व तांत्रिक साधनाएँ करना विशेष रूप से फल देने वाला माना जाता है | Kamakhya Devi Mandir कामाख्या देवी मंदिर अपनी इन अनूठी प्रथाओं व तांत्रिक साधनाओं के कारण ही भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है | माँ कामाख्या देवी मंदिर को शक्ति स्वरुप देवी सती के 51 शक्तिपीठों में सबसे शक्तिशाली स्थान माना जाता है |

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2 thoughts on “कामाख्या देवी मंदिर, माँ के 51 शक्तिपीठों में से तांत्रिक क्रियाओं के लिए सबसे मशहूर

  1. Pawan astrolozer

    sahi hai jab b ladies ko je problam hoti hai tab onhe kisi devi devta ki koi poja nahi krni cahiye
    kiyu ki jab je prob lam hoti hai tab ladies ka magal , surya,moon planat kamjoor ho jate hai or Rahu,Ketu,sani satrong ho jate hai…
    jise onpar evil spirt i mean nagitive super natural power attack krti hai .

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