रुद्राक्ष पहनने के नियम | रुद्राक्ष से पूर्ण लाभ प्राप्त करना है तो इन नियमों का पालन अवश्य करें
March 26, 2018
साक्षात् भगवान शिव के रूद्र रूप कहे जाने वाले रुद्राक्ष की उत्त्पति भगवान शिव की आँखों से निकले आंसुओं से हुई | पुराणों में ऐसा वर्णन है कि लम्बे समय तक साधना में लीन भगवान शिव ने जैसे ही अपनी आँखे खोली उनकी आँख से कुछ आंसू पृथ्वी पर आ गिरे | पृथ्वी पर जहाँ-जहाँ भगवान शिव के आंसू गिरे वहाँ रुद्राक्ष के पेड़ की उत्पत्ति हुई | इन पेड़ों पर लगने वाले फल के बीज ही रुद्राक्ष कहलाते है | शास्त्रों में वर्णित विधि अनुसार रुद्राक्ष धारण करने वाले जातक पर सदैव भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है | किन्तु शास्त्रों में वर्णित रुद्राक्ष धारण करने के नियमों(Rudraksh Pahane Ke Niyam) का हमेशा पालन करना चाहिए अन्यथा आप रुद्राक्ष के चमत्कारिक परिणामों से हमेशा-हमेशा के लिए वंचित होने लगते है |

रुद्राक्ष धारण करने की विधि :-
आज के समय में बहुत से लोग एक दुसरे को देखकर ही रुद्राक्ष धारण करने का मन बना लेते है व बाजार से रुद्राक्ष लेकर सीधे गले में धारण कर लेते है | ऐसे लोगों के लिए रुद्राक्ष केवल और केवल वस्तु का कार्य करता है जिससे जातक को रुद्राक्ष के वैज्ञानिक लाभ तो मिलते है किन्तु अध्यात्मिक लाभ नहीं मिल पाते | आइये जानते है रुद्राक्ष को धारण करने की विधि के विषय में : –
एक से लेकर 14 मुखी तक रुद्राक्ष तक आप गले में धारण कर सकते है | ये सभी रुद्राक्ष अध्यात्मिक द्रष्टि से अलग-अलग प्रभाव रखते है : – एक से लेकर 14 मुखी तक रुद्राक्ष के विषय में सम्पूर्ण जानकारी के लिए आप इस post को अवश्य पढ़े : – 1 से 14 मुखी रुद्राक्ष की सम्पूर्ण जानकारी
रुद्राक्ष का चुनाव करने के पश्चात् कुछ दिन इसे सरसों के तेल में डालकर रख दे | अब किसी सोमवार के दिन आप रुद्राक्ष को अच्छे से साफ़ करके इसे पहले पंचामृत( दूध,दही,शहद,शक्कर,गंगाजल के मिश्रण) से स्नान कराये फिर गंगा जल से स्नान कराये | अब कुमकुम से तिलक करें | दूप दिखाए व पूजा के स्थान पर दीपक जलाकर ॐ नमः शिवाय मंत्र के यथा संभव जप करें |
इस प्रकार करने के पश्चात् अब आप भगवान शिव के मंदिर जाकर शिवलिंग पूजा करें व अंत में रुद्राक्ष को शिवलिंग से स्पर्श कराते हुए भगवान शिव का ध्यान करें और अब रुद्राक्ष को गले में धारण करें |
Rudraksh Pahane Ke Niyam :
रुद्राक्ष पहनने के नियम :-
विधि अनुसार रुद्राक्ष को धारण(Rudraksh Pahane Ke Niyam) करने के पश्चात् इसकी पवित्रता को बनाये रखना बहुत जरुरी है अन्यथा यह कुछ समय के पश्चात् प्रभावहीन होने लगता है | जो व्यक्ति शराब,मॉस व दुसरे गलत कार्य करते हो उन्हें तो रुद्राक्ष को धारण करना ही नहीं चाहिए अन्यथा ऐसा व्यक्ति पाप का भागी बनता है |
- रुद्राक्ष धारण करने के पश्चात् समय-समय पर रुद्राक्ष को पंचामृत व गंगाजल द्वारा पवित्र करते रहे | रुद्राक्ष को गंदे हाथों से स्पर्श न करें | पूजा के समय रुद्राक्ष को दूप दिखाए |
- घर में सूतक आदि के समय आये तो इसके तुरंत बाद रुद्राक्ष को पवित्र करना न भूले |
- किसी दाह संस्कार या मृत व्यक्ति के दिनों में जाने के पश्चात् भी रुद्राक्ष को पवित्र करें |
- महिलाएँ रुद्राक्ष को पीरियड्स के दिनों में उतार कर रख दे व बाद में पवित्र करके ही पुनः धारण करें |
- दूसरों का अहित न करें व झूठ न बोले |
- अनैतिक संबंधों से दूर रहे |
- आप जिस रुद्राक्ष को धारण करते है उसे भूलकर भी किसी अन्य व्यक्ति को पहनने के लिए न दे चाहे वह आपके परिवार का ही कोई सदस्य क्यों न हो | किसी दुसरे का पहना हुआ रुद्राक्ष भी गले में धारण नहीं करना चाहिए |
- रुद्राक्ष खरीदने से पहले इसकी शुद्धता की अच्छी प्रकार से जांच कर ले | टूटा हुआ रुद्राक्ष व कीड़ा लगा हुआ रुद्राक्ष धारण करने योग्य नहीं होता |
अन्य जानकारियाँ :-
- रत्न क्या होते है ? ज्योतिष शास्त्र में रत्न का महत्व ! किस राशि के स्वामी को कौन सा रत्न धारण करना चाहिए
- चाँदी की अँगूठी धारण करने से होने वाले लाभ
- 5 मंगलवार चढ़ाये हनुमान जी चौला, होगी सभी मनोकामनाएँ पूरी
रुद्राक्ष को सोमवार के दिन, श्रावण मास में किसी भी दिन या शिवरात्रि के दिन धारण करना शुभ माना गया है | रुद्राक्ष को पूर्ण विधि अनुसार धारण करें व इससे सम्बन्धित नियमों/(Rudraksh Pahane Ke Niyam) का पालन करें | पूर्ण विधि अनुसार रुद्राक्ष पहनने से इसके चमत्कारिक परिणाम आप पहले दिन से ही अनुभव करने लगेंगे | भगवान शिव की नित्य पूजा करें | आपके जीवन से हर दुःख, कष्ट शीघ्र ही दूर होने लगेंगे |

yah imformetion bhot achi hei
Jai guru gorakhnath
Om namo aadhesh