सम्पूर्ण संकटमोचन हनुमान अष्टक | प्रतिदिन हनुमान अष्टक के पाठ से होती है सभी मनोकामनाएं पूरी

By | February 9, 2018

हनुमान जी की आराधना में हनुमान चालीसा , बजरंग बाण और संकटमोचन हनुमान अष्टक के पाठ का बड़ा महत्व है | संकटमोचन हनुमान अष्टक(Sankat Mochan Hanuman Ashtak) के नियमित पाठ से भक्त पर आये घोर से घोर संकट भी दूर होने लगते है |बचपन में हनुमान जी बहुत ही शरारती थे | शुरू से असीमित शक्तियों के स्वामी हनुमान जी, देवताओं और ऋषि-मुनियों को अपनी क्रीडाओं द्वारा परेशान भी करते है जिस कारण उन्हें बचपन में ही श्राप मिला था वे कि वे अपनी शक्तियों को भूल जायेंगे व दूसरों द्वारा याद दिलाने पर ही उन्हें अपनी शक्तियों का आभास होगा |

sankat mochan hanuman ashtak

संकटमोचन हनुमान अष्टक/Sankat Mochan Hanuman Ashtak के पाठ द्वारा भक्त उन्हें उनकी शक्तियों का स्मरण कराते है व उनसे अपने सभी संकट दूर करने का आग्रह करते है | हनुमान जी की आराधना के समय हनुमान जी से अपने संकटों को दूर करने के लिए बार-बार आग्रह करना चाहिए |

Sankat Mochan Hanuman Ashtak :

संकटमोचन हनुमान अष्टक :-

 

बाल समय रवि भक्षि लियो तब,
तीनहुं लोक भयो अंधियारों
ताहि सो त्रास भयो जग को,
यह संकट काहु सों जात  न टारो
देवन आनि करी विनती तब,
छाड़ि दियो रवि कष्ट निवारो
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो, को – १
बालि की त्रास कपीस बसै गिरि,
जात महाप्रभु पंथ निहारो
चौंकि महामुनि शाप दियो तब ,
चाहिए कौन बिचार बिचारो
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु,
सो तुम दास के शोक निवारो, – को – २
अंगद के संग लेन गए सिय,
खोज कपीश यह बैन उचारो
जीवत ना बचिहौ हम सो  जु ,
बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो
हेरी थके तट सिन्धु सबै तब ,
लाए सिया-सुधि प्राण उबारो,-  को – ३
रावण त्रास दई सिय को तब ,
राक्षसि सो कही सोक निवारो
ताहि समय हनुमान महाप्रभु ,
जाए महा रजनीचर मारो
चाहत सीय असोक सों आगिसु ,
दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो, -को – ४
बान लग्यो उर लछिमन के तब ,
प्राण तजे सुत रावन मारो
लै गृह बैद्य सुषेन समेत ,
तबै गिरि द्रोण सुबीर उपारो
आनि संजीवन हाथ दई तब ,
लछिमन के तुम प्रान उबारो, – को – ५
रावन युद्ध अजान कियो तब ,
नाग कि फांस सबै सिर डारो
श्री रघुनाथ समेत सबै दल ,
मोह भयो यह संकट भारो
आनि खगेस तबै हनुमान जु ,
बंधन काटि सुत्रास निवारो,-  को – ६
बंधु समेत जबै अहिरावन,
लै रघुनाथ पताल सिधारो
देवहिं पूजि भली विधि सों बलि ,
देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो
जाये सहाए भयो तब ही ,
अहिरावन सैन्य समेत संहारो,- को – ७
काज किये बड़ देवन के तुम ,
बीर महाप्रभु देखि बिचारो
कौन सो संकट मोर गरीब को ,
जो तुमसो नहिं जात है टारो
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु ,
जो कछु संकट होए हमारो,-  को – ८

दोहा
लाल देह लाली लसे , अरु धरि लाल लंगूर I
बज्र देह दानव दलन , जय जय जय कपि सूर II

हनुमान जी अपने भक्तों के भक्ति भाव से प्रसन्न होकर उन्हें शीघ्र ही फलीभूत करते है | इसलिए जब कभी भी बड़ी मुशीबत में फंस जाये तो संकटमोचन हनुमान अष्टक(Sankat Mochan Hanuman Ashtak) का पाठ 7 बार प्रतिदिन करना चाहिए साथ ही मंगलवार को व्रत भी रखना चाहिए |

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