हनुमान जी की आरती

By | December 18, 2018

किसी भी देव की आराधना के समय अंत में उनकी आरती अवश्य की जाती है | कलियुग के समय में हनुमान जी की आराधना करना विशेष रूप से फल प्रदान करने वाला माना गया है | हनुमान जी की आराधना के समय भक्त हनुमान चालीसा पाठ , बजरंग बाण पाठ , हनुमान अष्टक पाठ या मंत्र जप द्वारा उनकी भक्ति करते है | वैदिक परम्परा के अनुसार हनुमान जी की आराधना के समय अंत में हनुमान जी की आरती(Hanuman Aarti) का लयबद्धता के साथ मध्यम स्वर में उच्चारण करना चाहिए | ऐसा करने से आपको पूजा का सम्पूर्ण फल प्राप्त होता है | 

अगर आप पूजा के समय सिर्फ हनुमान जी की आरती द्वारा ही उनका स्मरण करते है तो आरती से पहले नीचे दिए गये स्तुति मंत्र द्वारा उनका आव्हान अवश्य किया जाना चाहिए  | हनुमान जी स्तुति मंत्र इस प्रकार है : – 

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम्

दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम् |

सकलगुणनिधानं वानराणामधीशम्

रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि ||


Hanuman Aarti – आरती : हनुमान जी 

आरती कीजै हनुमानलला की, दुष्टदलन रघुनाथ कला की।

जाके बल से गिरिवर कांपे, रोग दोष जाके निकट न झांपै।

अंजनिपुत्र महा बलदायी, संतन के प्रभु सदा सहाई।

दे बीरा रघुनाथ पठाये, लंका जारि सिया सुधि लाये।

लंका-सो कोट समुद्र-सी खाई, जात पवनसुत बार न लाई।

लंका जारि असुर संहारे, सियारामजी के काज संवारे।

लक्ष्मण मूर्छित परे सकारे, आनि संजीवन प्रान उबारे।

पैठि पताल तोरि जम-कारे, अहिरावन की भुजा उखारे।

बाएं भुजा असुरदल मारे, दहिने भुजा सन्तजन तारे।

सुर नर मुनि आरती उतारे, जय जय जय हनुमान उचारे।

कंचन थार कपूर लौ छाई, आरति करत अंजना माई।

जो हनुमानजी की आरति गावै, बसि बैकुण्ठ परम पद पावै।

लंका विध्वंश किये रघुराई। तुलसीदास स्वामी किर्ती गाई ॥

आरती किजे हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥

जितना शीघ्र हो सके आपको हनुमान जी की इस आरती(Hanuman Aarti) को याद अवश्य कर लेना चाहिए | आरती का उच्चारण हमेशा मध्यम स्वर में लयबद्धता के साथ किया जाना चाहिए | हनुमान जी की आरती करते समय अपना सम्पूर्ण ध्यान हनुमान जी के चरणों में रखे | ब्रह्मचर्य का पालन करें | स्त्री को सम्मान दे व मांस-मदिरा का सेवन कदापि न करें | 

हनुमान जी के प्रति पूर्ण निष्ठा भाव रखते हुए उनकी पूजा आराधना करें (
Hanuman Aarti)| हनुमान जी आपकी सभी मनोकामनाओं को पूरा करेंगे |