कपालभाति प्राणायाम | रोगों को दूर करने व स्वस्थ रहने का मूल मंत्र

By | April 7, 2018

मानव शरीर को रोगमुक्त करने में व शरीर को वृद्धाअवस्था में भी स्वस्थ बनाये रखने में योग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है | योग केवल मानव शरीर को स्वस्थ करने की क्रिया ही नहीं अपितु यह तो योग का प्राथमिक कार्य है | प्राणायाम भी योग का ही हिस्सा है जो शरीर के आंतरिक भाग को बल देने के लिए उन्हें रोग मुक्त करने के लिए व ध्यान केन्द्रित करने के लिए किया जाता है | आधुनिक समय में योग गुरुओं ने कपालभाति प्राणायाम/(Kapalbhati Pranayam in Hindi) से मिलने वाले लाभों के विषय में आम जनता को जागरूक कर उन्हें रोगमुक्त होने में उनका मार्गदर्शन किया है | कपालभाति अकेला ऐसा प्राणायाम है जो असाध्य से असाध्य रोगों में  भी आश्चर्यजनक रूप से लाभ पहुँचाता है |

Kapalbhati Pranayam in Hindi

कपालभाति प्राणायाम :-

वैसे तो प्राणायाम के कई प्रकार है किन्तु सभी प्राणायाम में कपालभाति प्राणायाम सबसे अधिक लाभ पहुँचाने वाला प्राणायाम है | कपालभाति प्राणायाम के नियमित अभ्यास से योग गुरु यह दावा करते है कि 70% से 80% बिमारियों को ठीक किया जा सकता है | यहाँ तक कि कुछ योग गुरु तो कपालभाति प्राणायाम के नियमित अभ्यास से कैंसर जैसी बीमारी को भी ठीक करने का दावा करते है | इसमें कितनी सच्चाई है यह तो इसे अनुभव करने वाले ही बता सकते है | कपालभाति प्राणायाम/(Kapalbhati Pranayam in Hindi) जिसमें कपाल शब्द का अर्थ माथे(ललाट) से है और भात्ति शब्द का अर्थ चमक, रौशनी से है |

Kapalbhati pranayam in hindi

कपालभाति  प्राणायाम करने की विधि :-  

कपालभाति प्राणायाम खाली पेट सुबह व शाम के समय किया जा सकता है किन्तु प्रातः काल का समय किसी भी प्राणायाम को करने का सबसे उपयुक्त समय माना गया है | सुबह के समय किसी खुले स्थान पर आसन बिछाकर सामान्य योग मुद्रा में बैठ जाये | अब साँस को हल्के झटके के साथ नासिका के माध्यम से बाहर फेंके, सांस को बाहर फेंकते समय पेट के हिस्से को अंदर की तरफ धकेले | इस प्रकार आप साँस को बाहर झटके के साथ छोड़ते हुए पेट को अंदर की ओर खींचे | अब जैसे ही पेट को ढीला छोड़ेंगे सांस स्वतः ही फेफड़ों में आ जाएगी, अब फिर से पेट को अंदर खींचते हुए सांस को बाहर फेंके |

इस प्रकार नासिका के माध्यम से सांस को झटके से छोड़ते हुए पेट को अंदर खींचना कपालभाति प्राणायाम(Kapalbhati Pranayam in Hindi) कहलाता है | प्रथम दिन इस प्राणायाम को 2 मिनट से 4 मिनट तक ही करे, फिर बाद में धीरे-धीरे समय को बढ़ा दे | अच्छा अभ्यास होने पर इसे 20 मिनट से 30 मिनट तक आसानी से कर सकते है |

कपालभाति प्राणायाम करने के लाभ :-

  • कपालभाति प्राणायाम का सबसे शीघ्र प्रभाव आपके पाचन तंत्र पर होता है इस प्राणायाम से पाचन क्रिया ठीक होती है व कब्ज जैसी बीमारी भी शीघ्र दूर होने लगती है |
  • शरीर का बढ़ा हुआ वजन भी शीघ्र नियंत्रित होने लगता है | कपालभाति प्राणायाम के कुछ सप्ताह अभ्यास मात्र से ही व्यक्ति शरीर से हल्का महसूस करने लगता है | मोटापा कम करने के लिए कपालभाति प्राणायाम किसी वरदान से कम नहीं, किन्तु यह जरुरी है कि इसे थोड़े लम्बे समय तक नियमित रूप से किया जाये |
  • इस प्राणायाम के करने से चहरे पर तेज आता है व शरीर से सभी आलस्य दूर होते है |
  • हर प्रकार की मानसिक व्याधियाँ जैसे – चिंता, तनाव, नकारात्मक भाव आदि कपालभाति प्राणायाम करने से आसानी से दूर होने लगते है |
  • लीवर, अमाशय, ब्लड प्रेसर , शुगर, कोलेस्ट्रोल आदि से सम्बंधित बिमारियों में भी कपालभाति प्राणायाम आश्चर्यजनक रूप से लाभ पहुँचाता है |

कपालभाति प्राणायाम करते समय ध्यान रखने योग्य कुछ जरुरी बातें :-

  • गर्भवती महिलाओं को कपालभाति प्राणायाम नहीं करना चाहिए | बच्चे के जन्म के पश्चात् भी पूर्ण रूप से स्वस्थ हो जाने पर ही इस प्राणायाम को करना शुरू करे |
  • किसी भी प्रकार की सर्जरी के बाद जब तक पूर्ण रूप से ठीक न हो जाये, इस प्राणायाम को नहीं करना चाहिए |
  • हर्निया, स्लिप डिस्क, कमर दर्द होने पर इस प्राणायाम को नहीं करना चाहिए |
  • किसी असाध्य रोग से पीड़ित होने पर इस प्राणायाम को योग गुरु व अपने डॉक्टर से सलाह लेकर ही करना चाहिए |
  • ह्रदय रोग से पीड़ित रोगी को कपाल भाति बहुत ही धीमी गति से करना चाहिए |

Kapalbhati Pranayam in Hindi

अन्य जानकारियाँ :-

शरीर को रोगों से मुक्त करने के लिए व एक स्वस्थ जीवन जीने के लिए नियमित रूप से कपालभाति प्राणायाम/(Kapalbhati Pranayam in Hindi) करना सबसे उत्तम योग है आज से ही अपने जीवन में योग को अपनाये और अपने जीवन को सुखमय बनाये |

 

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