महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ ,जप की सरल विधि और लाभ |

By | October 25, 2017

Maha Mrityunjaya Mantra hindi / महामृत्युंजय मंत्र 

हिन्दू धरम में सर्वोच्च माने जाने वाले देवों के देव महादेव भगवान शिव की आराधना करने से मनुष्य सभी सांसारिक सुखों को प्राप्त कर अंत में मोक्ष को प्राप्त होता है | महामृत्युंजय मंत्र(Maha Mrityunjaya Mantra hindi) भगवान शिव का सबसे बड़ा मंत्र माना जाता है | ऋग्वेद में इस मंत्र का उल्लेख मिलता है | शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि ऋषि मार्कंडेय की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव द्वारा यह मंत्र ऋषि मार्कंडेय को दिया गया था | मोक्ष की इच्छा रखने वाले जातक के लिए महामृत्युंजय मंत्र(Maha Mrityunjaya Mantra hindi) सबसे उपयुक्त है |

Maha Mrityunjaya Mantra hindi me

Maha Mrityunjaya Mantra hindi 

महा मृत्युंजय मंत्र के जप करने के लाभ :- 

महामृत्युंजय मंत्र के जप/Jap करने से असाध्य रोग से पीड़ित व्यक्ति को रोग से छुटकारा मिलता है |यदि कोई ऐसा बीमार व्यक्ति जो असहनीय पीड़ा झेल रहा हो और जीवन और मृत्यु के बीच में दिखाई देने लगे | ऐसे में उस व्यक्ति के नाम से किसी विद्वान पंडित द्वारा महा मृत्युंजय मंत्र के सवा लाख जाप करवाने से सम्भावना है कि उसकी पीड़ा शांत हो जाये नहीं तो पीड़ित व्यक्ति अपनी पीड़ा से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त होता है| स्वस्थ व्यक्ति इस मंत्र/Mantra के नियमित जाप से मृत्यु के भय से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त होता है |

कुछ लोगों में ऐसी अवधारणा बनी हुई है कि महा मृत्युंजय मंत्र का जाप केवल विशेष परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए | किन्तु ऐसा नहीं है  महा मृत्युंजय मंत्र का जाप करना पूरी तरह से सुरक्षित है और किसी भी व्यक्ति द्वारा इस मंत्र का जाप किया जा सकता है | इस मंत्र के नियमित जाप और श्रवण मात्र से मनुष्य को सभी प्रकार से भय , रोग, दोष और पाप आदि से मुक्ति मिलती है | ऐसा व्यक्ति सभी सांसारिक सुखों को प्राप्त करता है और अंत में मोक्ष को प्राप्त होता है |

महामृत्युंजय मंत्र (Maha Mrityunjaya Mantra hindi) सम्पूर्ण अर्थ सहित : –

महामृत्युंजय मंत्र और मृत्युंजय मंत्र दोनों अलग -अलग है | सम्पूर्ण जानकारी न होने के कारण और इन्टरनेट पर दी जाने वाली गलत जानकारी से मृत्युंजय मंत्र को ही महामृत्युंजय मंत्र बताया जाता है | मृत्युंजय मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र में भिन्नता है जो कि इस प्रकार से है : –

मृत्युंजय मंत्र/ Mrityunjaya Mantra :- 

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्  
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥

हिंदी अनुवाद :  ” हम उस त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की आराधना करते है जो अपनी शक्ति से इस संसार का पालन -पोषण करते है उनसे हम प्रार्थना करते है कि वे हमें इस जन्म -मृत्यु के बंधन से मुक्त कर दे और हमें मोक्ष प्रदान करें | जिस प्रकार से एक ककड़ी अपनी बेल से पक जाने के पश्चात् स्वतः की आज़ाद होकर जमीन पर गिर जाती है उसी प्रकार हमें भी इस बेल रुपी सांसारिक जीवन से जन्म -मृत्यु के सभी बन्धनों से मुक्ति प्रदान कर मोक्ष प्रदान करें ” |

महामृत्युंजय मंत्र / Maha Mrityunjaya Mantra :-

|| ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्

उर्वारुकमिव बन्‍धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ ||

दोनों ही मंत्र का मूल अर्थ सामान है |

महामृत्युंजय मंत्र/ Maha Mrityunjaya Mantra के जप करने की सरल विधि : –

महामृत्युंजय मंत्र के जप व्यक्ति द्वारा स्वयं भी किये जा सकते है या फिर समय कम होने की दशा में विद्वान् पंडितों द्वारा भी कराये जा सकते है | यदि आप स्वयं इस मंत्र के जप करते है तो दी गयी विधि अनुसार इस महामंत्र के जप करें : –

मृत्युंजय मंत्र और महा मृत्युंजय मंत्र दोनों ही मन्त्रों के जप शिवालय में शिवलिंग में समक्ष बैठकर करने चाहिए | सोमवार के दिन से इस मंत्र के जप शुरू किये जाने चाहिए | इसके अतिरिक्त सावन मास में किसी भी दिन या शिवरात्रि के दिन भी मंत्र जप शुरू करने के लिए अति शुभ होते है | शास्त्रों के अनुसार इस मंत्र के सवा लाख जप करने से भयंकर से भयंकर बीमारी या पीड़ा से छुटकारा मिलता है | किन्तु आप अपने सामर्थ्य अनुसार पहले दिन ही जप की संख्या का संकल्प लेकर शुरू करें | इसमें आप 11000 , 21000 या आप अपने सामर्थ्य के अनुसार जप संख्या सुनिश्चित करें |

पहले दिन आप जितनी माला का जाप करते है प्रतिदिन उतनी ही माला का जाप करें | इसमें आप माला के जाप की संख्या बढ़ा सकते है किन्तु कम कदापि न करें |

सुबह के 11 बजे से पहले इस मंत्र के जप करने चाहिए, इसलिए सुबह का एक समय निश्चित करें और 21 दिन या फिर 41 दिन में मंत्र जप को पूरा करें |

शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर दूध , जल और फल ,फूल आदि सर्मपित कर शिवलिंग के समक्ष बैठ जाये और धुप और दीपक जलाकर मंत्र जप शुरू करें | यदि आप रूद्रअभिषेक द्वारा शिवलिंग पूजन करते है तो यह अति उत्तम और शीघ्र फल प्रदान करता है | रूद्र अभिषेक कैसे करें इसके लिए इस post को पढ़े : – || शिवलिंग पूजा विधि | भगवान शिव का रूद्र अभिषेक किस प्रकार से करना चाहिए || 

मंत्र जप/Jap शुरू करने से पहले संकल्प अवश्य ले | संकल्प लेने की सरल विधि :- हथेली में थोडा जल ले और बोले हे परमपिता परमेश्वर मैं (अब अपना नाम बोले ) गोत्र (अपना गोत्र बोले ) अपने रोग निवारण हेतु (या जिस भी कार्य के लिए आप मंत्र जप कर रहे है उसका नाम बोले ) महामृत्युंजय मंत्र के जप/Jap कर रहा हूं मुझे मेरे कार्य में सफलता प्रदान करें | ऐसी मैं कामना करता हूं | और ॐ श्री विष्णु , ॐ श्री विष्णु , ॐ श्री विष्णु  कहते हुए जल को नीचे जमीन पर छोड़ दे |

जैसे ही आप मंत्र जप की 1 या 2 माला जितनी भी आप प्रतिदिन करते है, पूरी कर लेते है तो अंत में फिर से हथेली में जल लेकर संकल्प ले और बोले : – हे परमपिता परमेश्वर मैं (अपना नाम बोले ) गोत्र (अपना गोत्र बोले ) , मेरे द्वारा किये गये महामृत्युंजय मंत्र के जप/Jap मैं श्री ब्रह्म को अर्पित करता हूं और अंत में – ॐ श्री ब्रह्मा, ॐ श्री ब्रह्मा, ॐ श्री ब्रह्मा कहते हुए जल को नीचे जमीन पर छोड़ दे | अब आप अपने आसन को थोडा से मोड़ कर खड़े जो जाये |

मंत्र जप/Mantra Jap के लिए रुद्राक्ष की माला का ही प्रयोग करें और मंत्र के जप माला को गोमुखी में रखकर ही करें |

मंत्र का उच्चारण मन ही मन में करें यदि ऐसा नहीं कर पाते है तो बिलकुल धीमे स्वर में उच्चारण कर सकते है | मंत्र का शुद्ध उच्चारण करें, उच्चारण में कोई त्रुटि न करें |

मंत्र/Mantra के जप काल के दिनों में पूरी तरह सात्विक रहें तथा शाकाहारी भोजन के साथ – साथ ब्रह्मचर्य का पालन करें |

असाध्य रोग का निवारण :- महामृत्युंजय मंत्र(Maha Mrityunjaya Mantra hindi) सभी प्रकार के रोगों का निवारण करने वाला मंत्र है | इसलिए कोई भी असाध्य रोग होने की दशा में यदि रोगी स्वयं मंत्र जप/Mantra Jap करने में सक्षम है तो अति उत्तम है अन्यथा किसी पंडित द्वारा या फिर परिवार के किसी सदस्य द्वारा मंत्र जप/Mantra Jap कराये जा सकते है |

कुंडली में कालसर्प योग दोष का निवारण : –   महामृत्युंजय मंत्र(Maha Mrityunjaya Mantra hindi) के मंत्र जप से कुंडली के सबसे जटिल दोष कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है | इस जन्म के और पूर्वजन्म के सभी प्रकार के पापों का नाश होता है |

पुत्र प्राप्ति व सुख- शांति  :- महामृत्युंजय मंत्र /Maha Mrityunjaya Mantra hindi के जप से पुत्र का योग बनता है | घर में सुख -शांति आती है | और सभी प्रकार के भय आदि से मुक्ति मिलती है | 

♣ नौकरी और व्यापार में उन्नति के अचूक उपाय ♣

हिन्दू धरम शास्त्रों के अनुसार महामृत्युंजय मंत्र/Maha Mrityunjaya Mantra hindi सबसे अधिक प्रभावशाली मंत्र है | भगवान शिव की विशेष कृपा पाने हेतु इस मंत्र का जप किसी भी व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है | किन्तु ध्यान रहे , महामृत्युंजय मंत्र के जप शिव मंदिर में शिवलिंग के समक्ष ही करने चाहिए | घर पर इस मंत्र के ज़प न करें |

 

 

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5 thoughts on “महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ ,जप की सरल विधि और लाभ |

  1. Mohit

    जय श्री महांकाल! इस पोस्ट के लिए लेखक का कोटि कोटि धन्यवाद|

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  2. हिंदी कहानी

    बहुत बहुत धन्यावाद शर्मा जी धार्मिक पोस्ट पड़कर कुछ और ज्ञान हुआ ,आपकी वेबसाइट बहुत से लोगों को सहायता कर रही है ,

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  3. Navin Chandra Bhatt

    मुझे भी जप करना है महामृत्युंजय 125000 कितने दिन में पूरा कर सकता हूँ

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    1. TARUN SHARMA Post author

      41 दिन में मंत्र जप पूरा करने का प्रयास करें |

      मंत्र जप के बाद हवन जरुर करें

      धन्यवाद

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